जीवन परिचय : केशवदत्त चिन्तामणि

हिन्दी के प्रचार-प्रसार में हिन्दी शिक्षकों, पुरोहितों एवं हिन्दी विद्वानों का बहुत बड़ा योगदान रहा है । परन्तु हिन्दी के नाम जीविका न कमाने वालों का भी उतना ही महत्वपूर्ण योगदान रहा है । हमारे समाज में अनेकों ऐसे लगनशील व श्रद्धालु व्यक्ति मिलेंगे जिन्होंने हिन्दी सेवा-कार्य को अपना धर्म बना लिया है । उनमें से एक त्यागी एवं समर्पित सेवक है त्रियोले निवासी श्रद्धेय केशवदत्त चिन्तामणि जी ।

वातावरण तो हमें प्रभावित करता ही है । केशवदत्त जी के घर पर नित्य सत्संग हुआ करता था । अतः वे भी इसी पथ पर चल पड़े और 1958 में जी.पी.शिक्षक बनने के बाद हिन्दी, वैदिक धर्म तथा संस्कृत की शिक्षा स्वालंबन प्राप्त की । वर्षों मुख्य –अध्यापक वा हेड-टीचर रह कर जी-जान लगा कर कई विद्यालयों को स्टार-स्कूल बनाने के बाद 1993 में सेवा-निवृत हुए । अपने पूरे कार्यकाल में, चिन्तामणि जी ने एक कुशल, इमानदार और समर्पित शिक्षक बनकर, एक अनुकरणीय राष्ट्रभक्त की मिसाल दी ।

केशवदत्त केवल रोजी-रोटी कमाने में व्यस्त नहीं रहे । कहा जा सकता है कि उनकी हर सांस समाज के लिए है । कई संस्थाओं से जुड़े रहकर कार्य करते रहे हैं । तीन-बुतीक आर्य समाज के कर्मठ सदस्य बनकर वर्षों तक संचालन में सहयोग करते रहे । 1988-1994 तक आर्य सभा के अंतरंग सदस्य रहकर अनेक महत्वपूर्ण गतिविधियों में अपना योगदान करते रहे । इसी प्रकार अन्य संस्थाओं से भी जुड़े रहकर अपनी सेवा का लाभ देते रहे हैं जैसे मॉरिशस स्वयंसेवक संघ, विश्व हिन्दी परिषद् , हिन्दू मूवमेंट , हिन्दी संघटन और इन्द्रधनुष सांस्कृतिक परिषद् , संस्कृत छात्रसंघ इत्यादि । उन्होंने त्रियोले प्रभात संघ की भी स्थापना की और त्रियोले प्रभात पाठशाला के भी संचालक रह चुके हैं । हाल ही में , आर्य वैदिक परिषद् की स्थापना करके , प्रधान के रूप में संजीवनी का कार्य कर रहे हैं।

परन्तु इस से आगे हिन्दी साहित्य सृजन भी कर रहे हैं और हमारे साहित्य को समृद्ध बनाने में योगदान कर रहे हैं । 'प्रतिक्षा ' और 'अनोखा मिलन ' दो कहानी-संग्रह तो हमने बड़ी चाव से पढ़े । विद्यार्थियों के लिए भी 'मॉरिशस की बाल कहानियाँ ' और 'लालिमा' दो बाल-कथा संग्रह भी प्रकाशित हुए हैं । स्थानीय पत्र-पत्रिकाओं में उनके ज्ञान-वर्द्धक लेख छपते रहे हैं । धर्म, भाषा, साहित्य और इतिहास में उनकी गहरी अभिरुचि है ।

घर पर, परिवार में केवल हिन्दी में बात होती है । उनकी धर्मपत्नी आर्य-पुरोहित हैं और बच्चे शिक्षा-अधिकारी व इंजिनियर भी हैं । निसन्देह केशवदत्त जी की दृष्टि, जीवन-शैली व समाज की उन्नति के लिए तपस्या अनुकरणीय है । आप युवा कार्यकर्ताओं के लिए सर्वथा एक प्रेरणा-स्त्रोत रहेंगे । ईश्वर से हम आपकी दीर्घायु की प्रार्थना करते हैं और आप के गहन अनुभव तथा आपकी निस्वार्थ सेवा का और अधिक दिनों तक लआभ उठाने की कामना करते हैं । हमारा राष्ट्र आप का सदा ऋणी रहेगा ।

राजनारायण गति


Profile of Munishwarlal Chintamunee

Address:

Ave. Manguiers, Quatre Bornes. Mauritius.

Phone No: 

4544220

Workplace:

Mahatma Gandhi Institute (www.mgirti.org)

Biography:
Dob:18 Feb. 1935 1957--
General purpose teacher of Primary gvt. schools. 1973--Hindi tutor, Teacher`s training college. !975--Education officer.mgi. 1977--Senior education officer.mgi. 1982--Lecturer, mgi. 1986 --Head, Department of languages.mgi. 1990--Senior lecturer,mgi. 1995--Retirement. Publications: 1.Pratham kiran (First rays) Poems.1960. 2.Shanti niketan ki aur (Towards Shanti niketan ) Poems. Neo press. 1961. 3.Lokpriya geet. (Popular songs).1964. 4.Hindi ke adhar stambha .The pillars of hindi. Hindi Lekhak Sangh.1966. 5.Mauritius ka hindi sahitya tatha anya nibandh .(Hindi literature of Mauritius and other essays) 1972. 6.Nav nirman ki bela. Time to rebuild. Poems. 1972. 7.Shahmi shahmi si awaz. Hesitating voice. Poems. 1977. 8.Desh ke phool. Flowers of the country. Songs for children. 1978. 9.Hindi padya parag (An anthology of best hindi poems for the students of sc.) 1979. 10. Hire chaamke dhul mein. (Diamonds in the dirt) . Poems. 1984. 11. Bal kavita mala. Series of poems for children. 1984. 12.Chabbhi sagar ki .(The key of labour party or ssr.) 1987. 13.Dhwanan. (The resonance) Kiranprayag Publication. 1989. 14.Maurishasiya hindi sahitya (Mauritian hindi literature) Part one. Hindi book centre,!994. 15.Maurishasiya hindi sahitya (Mauritian hindi literature) Part two.Hindi book centre.1996. 16.Raspunj ki rachnavli. (Works of Raspunj). Hindi lekhak sangh. 1997 17.Mauritius ki bal-kathayen. (Children`s stories of Mauritius.) Part one. Janvani Prakashan. 1998. 18.Mauritius ki bal-kathayen. (Children`s stories of Mauritius.) Part two. Janvani Prakashan. 1998. 19.Mauritius ki bal-kathayen. (Children`s stories of Mauritius.) Part Three. Janvani Prakashan. 1998. 20.Apni zamin ki talash. (In search of the land of identity) Poems. Atmaram & sons. 2000. 21.Mauritius ki swatantrata ki kahani. (Hindi version of -Story of independence of Mauritius) See below.Star publication. 2003. 22.Mauritius ka hindi sahitya.( Hindi literature of Mauritius). Hindi book centre. 2001.

Abhimanyu Unnuth

अच्छी तरह से भारत में साहित्यिक हलकों में प्राप्त हिंदी में एक उल्लेखनीय लेखक अभिमन्युUnnuth, जिसका काम (- - लाल पसीना 19 वीं सदी में भारतीय कामगारों के travails के एक शक्तिशाली कथन है विशेषकर "लाल pasina") है.


Overview of Mauritian Authors

Kalicharan Janardhan (2006), Bhuli Bisri Yadein, Star Publications

Ramdeo Dhurandhar (1986), Pucho Is Mati Se, National Publishing House (NOVEL)

Abhimanyu Unuth (2007), Matam Phuri, Pratibha Pratishthan (Stories)

Ramdeeo Dhurandhar (2003), Bante Bigarte Rishte (NOVEL)

Dr. Moonishwarlal Chintamannee (2000), Apni Zameen Ki Talaash (Hindi Poems), Aatmaraam and Sons

Mauritius Hindi Lekhah Sangh, (2006), Mauritius Ke Lok Kathaein, Star Publications

Dr. Hemraj Soondar (2002), Asweekriti mein Uthe Haath (Collection of Hindi Poems from Mauritius), Dept. of Hindi, MGI Moka, Natraj Prakashan

Pahlad Ramsurrn (2004), Mauritius Arya Samaj Aur Shuddi Andolan (social history), Aatmaram and Sons

Pahlad Ramsurrn (2001), Mohunlall Mohit Parivaar ke patra, Sarvedeshik Press

Dr. Dharmendre Prasad, (1999), Prahlad Ramsurun, keindre aur Vistar (CRITICAL APPRECIATION), Aatmaram and Sons

Mahesh Ramjeeawon (2003), Karmapha tatha anya Natak, Star Publications

Raj Heeramun (1998), Hanste Kaante (Collection of Poems), Vartika Publications